आत्महीन की ताली!
कैलिफोर्नियां की किसी स्टेट यूनिवर्सिटी में भारत में जन्मी कोई बिल्ली अगर कैट रेस भी जीत जाए, तो भी हम दुनिया और बिल्ली को ये बताना नहीं भूलते कि वो भारतीय मूल की है। बिल्ली ने अभी इनाम में मिला माउस फ्लेवर वाले कैट फूड का डिब्बा भी नहीं खोला होता कि गोरखपुर की कोई आंटी टीवी पर आ दुनिया को यह बताने लगती कि कैसे सालों पहले पड़ोस में रहने वाली यही बिल्ली जब पंद्रह फीट ऊंची दीवार फांदकर उसकी रसोई के भगोने में रखा सारा दूध एक झटके में पी गई थी, तभी वो जान गई थी कि ये लड़की एक दिन बहुत आगे जाएगी।
मैं सोचता हूं कि इस देश में ऐसी बहुत-सी हुनरमंद बिल्लियां हैं जिन्हें व्यवस्था के कुत्ते दौड़ा-दौड़ाकर विदेश भेज देते हैं और जब कभी वो किसी कैट रेस में अव्वल आती हैं तो पूरे का पूरा देश हिंदी फिल्मों के उस नशेड़ी बाप की तरह, जो छोडी हुई औलाद के शोहरत कमाने के बाद, उस पर दावा ठोकने आगे आ जाता है।
मगर अपनी ही औलादें, जो उसे अलग या कमज़ोर लगती है, उसे आज भी वो कलंक मानता हैं। तभी तो वो इस बात पर तो गर्व करता है कि हमारे यहां पला-बढ़ा शख्स सात समंदर पार दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी का सीईओ हो गया मगर इस पर उसे ज़रा-भी शर्म नहीं आती कि उसके अपने ही देश में दूसरे राज्यों से नौकरी के लिए आए छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जाता है।
इस बात पर तो उसका खून खौलता है कि ऑस्ट्रेलिया गए उसके कुछ बच्चों पर उनकी खाल की वजह से हमला हो गया मगर इसका उसके पास कोई जवाब नहीं होता कि जब उसका अपना ही एक बच्चा पराए राज्य में अपने बालों की वजह से कत्ल कर दिया जाता है।
ये हमारा ही कमाल है कि जिन इरफान खान को लंच बॉक्स में उनकी शानदार अदाकारी के लिए दुबई के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव बेहतरीन एक्टर का अवार्ड दिया गया, उन्हें हमारे सबसे पुराने फिल्म फेयर अवॉर्ड ने बेहतरीन एक्टर की श्रेणी में नॉमिनेट करना भी गंवारा नहीं समझा। सच...आत्महीनता का मारा, मान्यता का मुंतज़िर मुल्क ताली भी पीटता है तो नहीं जानता, ये विषय गर्व का है या शर्म का!
मैं सोचता हूं कि इस देश में ऐसी बहुत-सी हुनरमंद बिल्लियां हैं जिन्हें व्यवस्था के कुत्ते दौड़ा-दौड़ाकर विदेश भेज देते हैं और जब कभी वो किसी कैट रेस में अव्वल आती हैं तो पूरे का पूरा देश हिंदी फिल्मों के उस नशेड़ी बाप की तरह, जो छोडी हुई औलाद के शोहरत कमाने के बाद, उस पर दावा ठोकने आगे आ जाता है।
मगर अपनी ही औलादें, जो उसे अलग या कमज़ोर लगती है, उसे आज भी वो कलंक मानता हैं। तभी तो वो इस बात पर तो गर्व करता है कि हमारे यहां पला-बढ़ा शख्स सात समंदर पार दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी का सीईओ हो गया मगर इस पर उसे ज़रा-भी शर्म नहीं आती कि उसके अपने ही देश में दूसरे राज्यों से नौकरी के लिए आए छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जाता है।
इस बात पर तो उसका खून खौलता है कि ऑस्ट्रेलिया गए उसके कुछ बच्चों पर उनकी खाल की वजह से हमला हो गया मगर इसका उसके पास कोई जवाब नहीं होता कि जब उसका अपना ही एक बच्चा पराए राज्य में अपने बालों की वजह से कत्ल कर दिया जाता है।
ये हमारा ही कमाल है कि जिन इरफान खान को लंच बॉक्स में उनकी शानदार अदाकारी के लिए दुबई के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव बेहतरीन एक्टर का अवार्ड दिया गया, उन्हें हमारे सबसे पुराने फिल्म फेयर अवॉर्ड ने बेहतरीन एक्टर की श्रेणी में नॉमिनेट करना भी गंवारा नहीं समझा। सच...आत्महीनता का मारा, मान्यता का मुंतज़िर मुल्क ताली भी पीटता है तो नहीं जानता, ये विषय गर्व का है या शर्म का!
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