Wednesday, October 29, 2014


गिरता आत्मसम्मान

जब भी आप ऐसे प्रोफेशन में होते हैं जहां आपकी "credibility" आपकी "निष्पक्षता" होती है तो आपको इस बात को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है कि आप अपनी बात या व्यवहार से किसी के प्रति ज़्यादा स्नेह दिखाते प्रतीत न हो।

सालों तक क्रिकेट मैच देखने के दौरान मैंने कभी भी (एक-आध बार छोड़कर) किसी बड़े अंपायर को किसी खिलाड़ी से ज़्यादा हंसी मज़ाक करते, उसके कंधे पर हाथ रखते या ऐसी किसी मुद्रा में नहीं देखा जो उनके निष्पक्ष ओहदे की मर्यादा के खिलाफ हो। इसलिए जब पत्रकारों की प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी खिंचवाने और उस पर इतराते हुए उसे ट्वीटर पर पोस्ट करते देखा, तो बेहद आपत्तिजनक लगा। पत्रकार होने के नाते आपको अपने प्रोफेशन की dignity का ख्याल रखना चाहिए था न कि प्रधानमंत्री द्वारा ऐसा करने पर ओतप्रोत हो जाना चाहिए था।

इस मौके पर मुझे केबीसी में आई उस महिला की याद आ गई जिसने शाहरूख के आगे बढ़कर खुद ही उसको गले लगाने पर उन्हें मना कर दिया था। स्टार होने के नाते शाहरूख को ये लग सकता है कि उनसे गले लगना किसी के लिए भी (चाहे वो औरतों ही क्यों न) बड़े फक्र की बात हो सकती है, मगर महिला (खासकर भारतीय महिला) होने के ये आपको भी decide करना है कि क्या आप ऐसा करने में सहज हैं। और अगर नहीं है, तो बिना इस संकोच के कि, सामने वाला बड़ा स्टार है, मना कर देना चाहिए था जैसा उस महिला ने किया...इसलिए अगर खुद मोदी ने ही पहल कर पत्रकारों के साथ सेल्फी खिंचवाना शुरू किया तो, जिन्हें ये बात आपत्तिजनक लगी भी, उन्हें खुद ही ऐसा करने से मना कर देना चाहिए था।

किसी झिझक में खिंचवा भी ली, तो उस पर इतराना नहीं चाहिए था। एक पत्रकार के नाते अगर आप किसी के पद या शख्सियत से इतने अभिभूत हैं कि उसके साथ फोटो खिंचवाना गर्व की बात मानते हैं तो ये उम्मीद कैसे की जा सकती है कि आपमें इतने पेशेवर ईमानदारी और नैतिक साहस होगा कि अगर कल को उसके खिलाफ कुछ लिखना पड़े, तो आप लिख देंगे।

शायद आज के दौर में आत्मसम्मान वो चिड़िया है, जिसे लुप्त हो चुकी पक्षियों की सूची में डाला जा चुका है। हम क्या हैं, कौन हैं, हमारी ज़िम्मेदारी क्या है अगर न पता हो तो वही तमाशा खड़ा होता है जो भारतीय संसद में बिल क्लिंटन से हाथ मिलाने को लेकर मची सांसदों की भगदड़ में मचा था। ऐसा लगा था कि मानों मंगलवार को मंदिर के बाहर फ्री की आलू-पूड़ियां लेने के लिए कुछ गरीब रिक्शेवालों मारामारी कर रहे हैं।