फुलक्रीम सपना, डबल टोंड हकीकत!
हम भारतीयों को सोना इस हद तक पसंद है कि जब सोते हैं तब भी ख्वाब में ‘सोना’ ही देखते हैं। बाबा ने सोने का ख्वाब देखा और चैनल भी जनता को ख्वाब दिखा रहा है। वो बता रहा है कि कैसे अगर सोना मिल गया तो घुटना प्रत्यारोपण को तरस रही अर्थव्यवस्था, उसेन बोल्ट से भी तेज़ दौड़ने लगेगी। सालाना जीडीपी का तिगुना पैसा मिल जाएगा और हर भारतीय को 2500 रुपये दिए जा सकेंगे।
हर भारतीय को 2500 रुपए...ये बात सुन ‘बालिका वधू’ के लिए पति से रिमोट छीनने आई बीवी रुक जाती है। ‘जीडीपी से तिगुने’ की बात समझने में नाकाम रहा पति चौकन्ना हो जाता है और कुछ देर पहले फुल क्रीम दूध के दाम बढ़ने की ख़बर सुनने से मुरझाए पति-पत्नी के चेहरे खिल उठते हैं।
न चैनल समझाने की कोशिश करता है और न ही रिमोट के लिए झगड़ता योद्धा परिवार ये समझने की कि उसे ये पैसा मिलेगा कैसे?आ
क्या किसी दिन दरवाज़े पर लगी घंटी बजा डाकिया पूछेगा-शर्मा जी, आप ही हैं? जी हां…ये ज़रा, यहां दस्तख़त कर दें....मगर ये क्या...अरे सर, वो उन्नाव में जो हज़ार टन सोना मिला है...उसी में आपके हिस्से के ढाई हज़ार हैं।
मीलॉर्ड, मैं फाज़िल दोस्त को बताना चाहूंगा कि सपने में दबा सोना देखने की बात तो फिर भी सच हो सकती है मगर उस सोने को बेचकर देश के हर आदमी को उसका हिस्सा दे दिया गया है, ये बात तो बड़े से बड़ा सिद्ध पुरुष सपने में भी नहीं देख सकता।
साथ ही मैं ये भी पूछना चाहूंगा कि कथित हिस्सेदारी का ऐसा ही ख्वाब उसे तब भी दिखाया गया था, जब स्विस बैंको में जमा कालाधन भारत लाने की बात हुई थी और तब भी, जब पद्मनाभ मंदिर का छठा तहखाना खुलने की ख़बर थी, मगर उसे आज तक मिला क्या...
इसलिए मित्र भोले भंडारी, अब भी वक्त है संभल जाओ, चुपचाप रिमोट बीवी के हवाले कर उसे जगिया की तीसरी शादी का गणित समझने दो और खुद ये हिसाब लगाओ कि फुलक्रीम की एक थैली बंद करवा, उसकी जगह डबलटोंड थैली लगवाने से, बढ़ी कीमतों की कितनी भरपाई हो पाएगी।