Thursday, August 8, 2013


हम शान्ति चाहते हैं, जंग नहीं, पर अगर शान्ति जंग से है, तो जंग ही सही 


बीते दिनों ५ अगस्त , २०१३ को पकिस्तान की तरफ से जम्मू कश्मीर के पूछ सेक्टर के सरवा पोस्ट पर जो कायराना हरकत की गयी है, जिसमे हमारे ५ जवानों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी, पहले तो भारत माँ के उन वीर जवानों को शत शत नमन! इश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे और उनके परिवार वालों को इस कठिन वक़्त से लड़ने की हिम्मत और शक्ति दे!
शहीद सैनिकों की मौत के खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर है, देशभर में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पाकिस्तान की कायराना हरकत पर भारत सरकार से मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की जा रही है, पर विडम्बना ये है की हमारे सेवक, इस तरह के सवेंदनशील मुद्दों पर भी ऐसे ऐसे हृदय विदारक बयान देते हैं ! रक्षा मंत्री अंटोनी और बिहार सरकार के मंत्री भीम सिंह जी के बयानों पर अगर हम गौर करें तो लगता है ये हमारे प्रतिनिधि न हो कर, पकिस्तान के "सेवक" हैं, जैसे इनकी संवेदनाएं मिट गयी हैं , ये सब एक लाश ही नहीं, एक नपुंसक लाश हो गए हैं! ऐसे कठिन समय में भी प्रधानमन्त्री जी की चुप्पी हमारे भारतीय लोकतंत्र की गरिमा को तार तार करती है! ३१ अगस्त, २०११ - १ जवान शहीद - प्रधान मंत्री का बयान - ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे, ८ जनवरी, २०१३ - २ जवान शहीद - - प्रधान मंत्री का बयान - ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे, ७ जून, २०१३ - १ जवान शहीद - - प्रधान मंत्री का बयान - ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे, २४ जून, २०१३ - ८ जवान शहीद - - प्रधान मंत्री का बयान - ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे, २७ जुलाई, २०१३ - १ जवान शहीद - - प्रधान मंत्री का बयान - ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे और अब ५ अगस्त, २०१३ - ५ जवान शहीद. थोड़ी देर में प्रधान मंत्री का बयान आएगा - हम ऐसी कार्यवाही की निंदा करते हैं, ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे. लानत है ऐसे प्रधान मंत्री पर!
मनमोहन शांत रहते हैं। रक्षामंत्री गलत बयान देते हैं। सेना को कुछ न करने का दबाव है। ऐसे कठिन दौर में आखिर आम आदमी क्या करे! क्या उन शहीद जवानों की माताओं, बहनों और बीवियों के चीत्कारों का कोई मोल नहीं है! शहीदों के पार्थिव शरीर जब विमान से पटना एअरपोर्ट पर आते हैं तो उनकी सुध लेने वाला राज्य सरकार का एक भी मंत्री का वहां मौजूद न होना इस बात का पर्याय है की हमारे सैनिकों के प्रति इन नकली सेवकों के मन में कितनी आदर भावना है!
अब "पकिस्तान मुर्दाबाद कहना भी हो गया गुनाह !! जब बीजेपी ने राज्यसभा में पाकिस्तान के हमले और उस पर ए के अंटोनी के बचाव वाले बयान का विरोध किया था तब बीजेपी की सांसद स्मृति ईरानी ने सामने आकर "पाकिस्तान मुर्दाबाद" के नारे लगाये। लेकिन इस पर राज्यसभा ने स्मृति ईरानी समेत 20 सांसदों को नोटिस जारी किया । प्रिय सेवकों, कार्यवाही करनी है तो पकिस्तान पर करें, यहाँ मर्दानगी दिखने से क्या फायदा?
मानता हूँ की भारत एक शान्ति प्रिय देश है, हम सब अहिंसा के रास्ते पे चलने वाले लोग हैं पर इसका मतलब ये तो नहीं की हम कभी चीन की धमकियों को नज़र अंदाज़ कर दें और ऐसे मुल्क की घटिया हरकतों को भी, जिसके यहाँ का आटा भी विदेशी चक्कियों में पीस कर आता है , जिसकी एक सुई बनाने की औकात नहीं और हमें आँख दिखाता है! लगता है ये देश १९६५, १९७१ और १९९९ भूल गया है! हमें इनकी यादों को ताज़ा करने की जरुरत आन पड़ी है अब! मानता हूँ की हम शान्ति चाहते हैं, जंग नहीं, पर अगर शान्ति जंग से है तो जंग ही सही!

जय हिन्द जय भारती !
वन्दे मातरम!

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